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“त्वचा रोग क्यों होते हैं? जानिए त्रिदोष सिद्धांत और आयुर्वेदिक औषधियाँ”

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👉 त्वचा रोगों में आयुर्वेद: त्रिदोष सिद्धांत, औषधियाँ और सावधानियाँ  त्वचा रोगों में उपयोगी आयुर्वेदिक औषधियाँ  त्वचा रोग आयुर्वेद  के अनुसार त्वचा रोग (कुष्ठ, दाद, खुजली, एक्ज़िमा, मुहाँसे आदि) का मुख्य कारण शरीर का असंतुलन  होना, रक्त दूषित होना और गलत खान -पान माना गया है। नीचे दी गई औषधियों कि जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्य के लिए है👇 त्वचा रोगों में आयुर्वेदिक औषधियाँ (शैक्षिक जानकारी ) नीम के लाभ और सावधानियाँ नीम (Azadirachta indica) - नीम रक्त को ‌शुद्ध करती है खुजली, दाद, फंगल इन्फेक्शन की समस्याओं में लाभकारी आयुर्वेदिक औषधि है  मुहाँसे में सूजन, लालिमा और दर्द को  कम करने का कार्य करता है और  नए मुंहासे बनने से रोकता है सावधानी / नुकसान: अधिक  मात्रा में सेवन करने से पेट दर्द, उलटी  कि समस्या हो सकती है गर्भावस्था में निषेध लंबे समय तक अधिक मात्रा नुकसान देह हल्दी के फायदे और नुकसान हल्दी (Curcuma longa) हल्दी सूजन को कम करने के लिए उपयोगी है एवं एलर्जी से बचाव करती है , संक्रमण को कम करने में सहायक है घाव भरने का भी कार्य करतीं ...

पुरुष रोगों में उपयोगी आयुर्वेदिक औषधियाँ

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  यहाँ आयुर्वेद में वर्णित पुरुष रोग,वीर्य कि मात्रा को बढ़ाने वाली तथा शरीर की कमजोरी, धातु-क्षय, थकान तथा यौन दुर्बलता को दूर करने वाली प्रमुख औषधियों कि उपयोगी जानकारी दी जा रही है👇 आयुर्वेद के अनुसार पुरुष रोगों के मुख्य कारण: आयुर्वेद में पुरुष रोगों का मुख्य कारण असंतुलित आहार एवं मानसिक तनाव, ब्रह्मचर्य का अभाव(ब्रह्मचर्य का पालन न‌ करना) और नशे की आदतें हैं ब्रह्मचर्य का महत्व और इसके लाभ पुरुषों को नियमित रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए ब्रह्मचर्य का पालन करने से शारीरिक एवं मानसिक शक्तिओ का विकास होता है ब्रह्मचर्य को नियमित रूप से पालन करने पर शरीर में एक नई उर्जा का संचार होता है, शरीर मे ताकत एवं सहन करने कि क्षमता विकसित होती है और रोग प्रतिरोधक(रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।, ब्रह्मचर्य को अपनाने से किसी भी कार्य को करने में पुरा मन लगता है किसी भी लक्ष्य को हासिल करने में आसानी होती है मन एक जगह केन्द्रित रहता है मन शांत रहता है  ब्रह्मचर्य, योग और सात्त्विक जीवनशैली का संबंध ब्रह्मचर्या के लिए जिस प्रकार सात्विक, पौष्टिक और हल्का भोजन ज़रूरी है ठिक उ...

स्त्री रोग में उपयोगी औषधि

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  स्त्री रोग में उपयोग होने वाली आयुर्वेदिक औषधियां एवं उनके लाभ शतावरी (Shatavari)   शतावरी का उल्लेख आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता जो आयुर्वेद की प्रसिद्ध औषधि है, जो विशेष रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है। यह शरीर में हार्मोनल संतुलन को बनाए रखने में मदद करतीं है तथा रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। यह औषधि स्तनपान कराने वाली माताओं में दूध की मात्रा बढ़ाने में सहायक  है। इसके नियमित सेवन से शारीरिक थकान कम होता है, कमजोरी दूर होती है और संपूर्ण शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक औषधि है। शतावरी  कच्ची जड़ी-बूटी, पाउडर, कैप्सूल या रस के रूप में  हो सकती है उपयोग करने का तरीका (Usage मात्रा: 👉 500 मि.ग्रा. से 1 ग्राम दिन में: 👉 1 बार  गर्म दूध या पानी के साथ लेने की सलाह दी जाती है।  सेवन करने से पहले डॉक्टर कि सलाह जरुरी है ⚠️ सावधानियाँ अधिक मात्रा मे सेवन करने से गैस या दस्त हो सकते हैं डायबिटीज या अन्य गंभीर रोग में चिकित्सकीय सलाह जरूरी है गर्भावस्था या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में, चिकित्सक क...

पाचन कि समस्यो में अत्यंत लाभकारी औषधि

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  पाचन की समस्या को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक ग्रन्थों में कई प्रभावी औषधियों को  बताया गया हैं।  जिनमें से कूछ औषधि को आसान हिन्दी भाषा में, समस्या के अनुसार  शैक्षिक जानकारी हेतु निचे दिया जा रहा है जो स्वास्थ्य जीवन के लिए बहुत ही उपयोगी है केवल शैक्षिक जानकारी के लिए आयुर्वेद के अनुसार पाचन तंत्र का महत्व आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार पाचन तंत्र (Digestive System) जिस पर ही पूरे शरीर की स्वास्थ्य टिका है। जब शरीर में पाचन बिगाड़ता  है तो गैस, कब्ज, अपच, दस्त, अम्लता जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।  पाचन शक्ति क्या है? कमजोर पाचन शक्ति (अपच) क्या होती है  भोजन करने के बाद आपके शरीर में भोजन ठीक से नहीं पच  पा रहा है, तो   इसे आयुर्वेद कि भाषा में कमजोर पाचन शक्ति कहते हैं।  इसको और आसान  भाषा में  अपच कह सकते हैं  अपच, गैस, कब्ज, दस्त व अम्लता क्यों होती है   पहले जानेंगे छोटा-सा कारण कि ये समस्या क्यों होती है , और साथ में जानेंगे कुछ आयुर्वेद कि उपयोगी जानकारी  जो इन समस्यो में उपयोगी मानी जाती है 👇 सह...

आयुर्वेद की 50 औषधियों का संक्षिप्त परिचय

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 ‌‌यहा 50 आयुर्वेदिक औषधियों के  संक्षिप्त परिचय एवं सेवन से संबंधित आवश्यक सावधानियाँ एवं सलाह सरल और स्पष्ट भाषा में दी जा रही हैं प्रमुख आयुर्वेदिक औषधियाँः उपयोग, मात्रा एवं सावधानियाँ आयुर्वेद में औषधियों का प्रयोग शरीर, मन और आत्मा के संतुलन हेतु किया जाता है। सही मात्रा और सावधानी पूर्वक ली गई औषधियाँ रोग निवारण के साथ-साथ स्वास्थ्य  में भी सहायक  सिद्ध होती हैं। नीचे कुछ प्रमुख आयुर्वेदिक औषधियों का संक्षिप्त परिचय उपयोगी विवरण प्रस्तुत है। 1 .हल्दी (Haridra ) हल्दी में एंटीबायोटिक गुण होता है यह सूजन, घाव, त्वचा रोग और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में उपयोगी होता  है। हल्दी (Curcuma longa) उपयोग : सूजन, घाव, जोड़ों का दर्द, और पाचन सुधार में उपयोगी मात्रा : चूर्ण: 1–2 ग्राम,काढ़ा / दूध: रोजाना सावधानी : अत्यधिक सेवन से पेट दर्द हो सकता है 2 .अश्वगंधा (Ashwagandha) यह एक शक्तिवर्धक औषधि है।  जो कमजोरी, तनाव, अनिद्रा और मानसिक थकान में लाभकारी मानी जाती है। उपयोग : कमजोरी, तनाव मात्रा : 3–5 ग्राम चिकित्सक के परामर्श अनुसार ⚠️ सावधानियाँ अत्यधिक सेवन...

स्वास्थ्य और दिर्घायु जीवन जीने कि शैली

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  स्वस्थ जीवन-शैली (Healthy Lifestyle) अपनाने के लिए नीचे दी गई बहुत उपयोगी और ज़रूरी बातें 👇 स्वस्थ और दीर्घायु जीवन के लिए आदर्श दिनचर्या ब्रह्ममुहूर्त में शुद्ध वायु का महत्व, शुद्ध हवा शुबह 4 बजे ब्रह्ममुहुर्त से सुर्योदय तक अवश्य चलती है। उस समय टहलना स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है सुबह 4 बजे टहलने के चमत्कारी लाभ लम्बा जीवन जीने और स्वास्थ्य रहने के लिए सुबह 4बजे टहलना किसी रहस्य से कम नहीं है सुबह टहलने से ह्रदय स्वस्थ रहता है शुद्ध आक्सीजन से फेफड़े मजबूत होते हैं सुबह 4बजे भ्रमण करने से  लकवा, गठिया, मधुमेह, दौरा मानसिक तनाव रोग सदैव के लिए भाग जाते हैं | उषःपान (Usha Paan) का आयुर्वेदिक महत्व 🌅💧 शुबह मुंह में पानी भर कर कुला अवश्य करना चाहिए   तांबा के बर्तन में  पानी भरकर पानी को थोड़ा-थोड़ा करके धिरे -धिरे पीना चाहिए । जिसको उषःपान कहते हैं। उषा:पान (Usha Paan) 🌅💧 उषा पान का अर्थ है सुबह सूर्योदय से पहले खाली पेट पानी पीना। आयुर्वेद में इसे स्वास्थ्य और दीर्घायु जीवन के लिए बहुत ही उपयोगी माना गया है। उषःपान की विधि:  उषःपान शुरू करते समय प्...