पाचन कि समस्यो में अत्यंत लाभकारी औषधि

  पाचन की समस्या को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक ग्रन्थों में कई प्रभावी औषधियों को  बताया गया हैं।  जिनमें से कूछ औषधि को आसान हिन्दी भाषा में, समस्या के अनुसार  शैक्षिक जानकारी हेतु निचे दिया जा रहा है जो स्वास्थ्य जीवन के लिए बहुत ही उपयोगी है


केवल शैक्षिक जानकारी के लिए

आयुर्वेद के अनुसार पाचन तंत्र का महत्व

आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार पाचन तंत्र (Digestive System) जिस पर ही पूरे शरीर की स्वास्थ्य टिका है। जब शरीर में पाचन बिगाड़ता  है तो गैस, कब्ज, अपच, दस्त, अम्लता जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। 

पाचन शक्ति क्या है?

कमजोर पाचन शक्ति (अपच) क्या होती है

 भोजन करने के बाद आपके शरीर में भोजन ठीक से नहीं पच  पा रहा है, तो   इसे आयुर्वेद कि भाषा में कमजोर पाचन शक्ति कहते हैं।  इसको और आसान  भाषा में  अपच कह सकते हैं 

अपच, गैस, कब्ज, दस्त व अम्लता क्यों होती है 

पहले जानेंगे छोटा-सा कारण कि ये समस्या क्यों होती है , और साथ में जानेंगे कुछ आयुर्वेद कि उपयोगी जानकारी  जो इन समस्यो में उपयोगी मानी जाती है 👇

सही पाचन के लिए आयुर्वेदिक जीवनशैली

जितनी आप कि भुख है उतना हि भोजन करना चाहिए अधिक मात्रा में भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए 

जब आपको भुख लगें तभी ही भोजन का सेवन कराना चाहिए

 ठोस एवं भारी भोजन जिसे पचाने में समय लगे येसे भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए

भोजन के साथ-साथ अधिक मात्रा में पानी का सेवन नहीं करना चाहिए(आवश्यकता अनुसार थोड़ा पानी पी सकते हैं)

भोजन को हमेशा नियमित रूप से करना चाहिए भोजन को  चब्बा -चब्बा कर अच्छी तरह से खाना चाहिए भोजन करते समय भोजन को बिना चबाए निगलना नहीं चाहिए

पर्याप्त मात्रा में निंद लेनी चाहिए

चिंता और कष्ट से हमेशा दूर रहना चाहिए

सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए

शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना जीवन में बहुत ही जरूरी है

भोजन और पाचन का आपसी संबंध

पहला भोजन पचने के बाद ही दूसरा भोजन क्यों करें पहले जो भोजन किया गया है जब तक।  वो आहार पूरी तरह से शरीर में न पच जाये तब तक दुसरा भोजन नहीं करना चाहिए 

गैस की समस्या में क्या करें, क्या न करें

खानपान में विशेष ध्यान देना चाहिए एवं अत्यधिक भोजन कभी नहीं करना चाहिए जितनी आवश्यकता है उतना हि करना चाहिए 

इन्द्रियों को संयम  रखने का महत्व

इन्द्रियों पर नियंत्रण नहीं, संतुलन क्यों जरूरी है

अपने इन्द्रियों पर हमेशा संयम रखना चाहिए

आँख, कान, जीभ, नाक, त्वचा और मन —

इन सब पर नियंत्रण नहीं, संतुलन रखना ही संयम है।

कहां जाता है न जिसने इन्द्रियों को जीत लिया, उसने स्वयं को जीत लिया।

जीभ का संयम क्यों आवश्यक है

जीभ का संयम रखना बहुत ही जरूरी है→ सही समय, सीमित व सात्त्विक भोजन हि करना चाहिए

दस्त 

दस्त-  दस्त में भारी भोजन, ज्यादा तले भोजन ठंडे पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए

साफ एवं ताजा पानी पीना चाहिए  ,जल का सेवन करते रहना चाहिए

जितनी आपकी पाचनशक्ति कि क्षमता है उससे अधिक कभी भी खाना नहीं  खाना चाहिए अपने पाचनशक्ति के अनुसार ही भोजन करना चाहिए

दस्त में लाभकारी आहार

दस्त में क्या खाना चाहिए

दस्त में मूंग कि दाल का सेवन करना लाभदायक होता है बेल, आंवला,और संतरा  भी उपयोगी माना जाता है

पाचन तंत्र को मजबूत करने वाली आयुर्वेदिक औषधियाँ

🔹 त्रिफला क्या है?

त्रिफला के घटक और आयुर्वेदिक महत्व

त्रिफला-त्रिफला जैसे नाम से ही मालूम हो रहा है कि इसमें तीन औषधियों का मिश्रण है अर्थात तीन फलो को मिलाकर हरड़, बहेड़ा,और आंवला जैसे प्रसिद्ध औषधि को ही मिलाकर  त्रिफला का निर्माण होता है जिसे  शरीर के लिए बहुत ही उपयोगी माना जाता है आयुर्वेद में इसका  उल्लेख मिलता है कि यह शरीर के लिए बहुत ही ज्यादा उपयोगी हैं जो शरीर  की  शुद्धिकरण करने का कार्य करता है  और संतुलन को बनाए रखता है 

त्रिफला को आयुर्वेद में तीनों दोषों का नाशक  भी माना जाता है

त्रिफला पाचन सुधारने में बहुत ही उपयोगी है यह पाचन सुधारने का कार्य करता है इसके सेवन से अपच,गैस,कब्ज जैसी समस्यो में राहत मिलती है इसके सेवन से पाचनशक्ति भी सही रहती है

त्रिफला के प्रमुख लाभ

त्रिफला रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद कर सकता

 है इसके सेवन से रोगप्रतिरोधक क्षमता मजबूत होता है

रक्त को शुद्ध करने में भी सहायक  मानी जाता है

वजन एवं शरीर को सन्तुलन  बनाए रखता है

त्वचा और बालों के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है

आंवला बालों के लिए बहुत ही उपयोगी माना जाता है।इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन C पाया जाता है, जो बालों की जड़ों को मजबूत करने में सहायक है, बालों का झड़ना कूछ हद तक कम करता है और उन्हें प्राकृतिक चमक  भी प्रदान करने का  कार्य करता  है।

⚠️ सावधानियाँ

ज्यादा मात्रा में लेने से दस्त या पेट दर्द  कि समस्या हो सकता है

गर्भवती महिलाएँ व गंभीर रोगी  सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें

लंबे समय तक लगातार सेवन न करें

🔹 पिप्पली क्या है?

पिप्पली के औषधीय गुण और लाभ

पिप्पली-  पिप्पली को  आयुर्वेद में  पाचन के  लिए बहुत महत्वपूर्ण औषधि माना गया है।

पिप्पली को आयुर्वेद में खांसी,जुखाम,और अस्थमा जैसे लोगों में उपयोगी माना गया है 

इसको पाचनशक्ति बढ़ाने वाली औषधि माना गया है यह अपच,एवं गैस जैसी समस्यो में बहुत ही उपयोगी है 

यह औषधि भुख बढ़ाने का भी कार्य करतीं हैं

और खांसी में कफ को पतला करके बाहर निकालने का भी कार्य करतीं हैं 

शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायता करती है

जोड़ो के दर्द के लिए भी फायदेमंद है

⚠️ सावधानियाँ

अधिक मात्रा में सेवन करने से जलन, एसिडिटी, कमजोरी  कि समस्या हो सकती है

गर्भावस्था,  और अल्सर, में सेवन करने से पहले डॉक्टर कि सलाह जरूरी है 

लंबे समय तक रोज़ सेवन न करें

🔹 बेल (श्रीफल) का आयुर्वेदिक महत्व

पाचन तंत्र के लिए बेल के लाभ

बेल- बेल एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक  वनस्पति वृक्ष है।  बेल को कई  जगह श्रीफल के नाम से भी जाना जाता है  जिसके  फल, पत्ते, छाल एवं जड़ो—में औषधीय गुण पाये जाते हैं जिन्हें विशेष रूप से  पाचन तंत्र के लिए एवं पाचनशक्ति मजबूत करने लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। 

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार बेल का पत्ता भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इसलिए शिव पूजा में बेलपत्र शिव जी की चरणों में अर्पित किया जाता है

आइए जानते हैं औषधि गुणो के लाभ के बारे में

बेल दस्त और पेचिश कि समस्या में बहुत ही उपयोगी माना गया है यह शरीर में पाचनशक्ति को बढ़ाता है और साथ में ही आतो को मजबूत करने का कार्य करता है  गैस एवं अपच कि समस्यो में लाभ पहुंचाता है  घाव एवं सुजन मे  भी इसका उपयोग किया जाता है और बेल मधुमेह रोगियों के लिए भी फायदेमंद है 

⚠️ सावधानियाँ

ज्यादा मात्रा में  सेवन करने से कब्ज  कि समस्या हो सकती है

कब्ज की समस्या में कच्चा बेल न लें

गर्भवती महिलाएँ,एवं मधुमेह रोगी सेवन करने से पहले  डॉक्टर कि सलाह जरूर लें

सोंठ (सूखी अदरक) क्या है?

सोंठ के आयुर्वेदिक गुण और उपयोग

सोंठ-सोंठ अदरक को सुखा कर बनाया जाता है सूखी हुई अदरक को को ही सोंठ कहां जाता है। आयुर्वेद में यह पाचन, कफ और सर्दी-खाँसी  जैसी समस्यो में अत्यंत उपयोगी मानी जाती है।

सोंठ के लाभ

गैस,अपच, पेट दर्द जैसी समस्यो में बहुत ही लाभकारी है 

कफ , खांसी, जुखाम में उपयोग होने वाली असरदार औषधि है 

जोड़ो के दर्द में भी फायदेमंद है

शरीर में भुख बढ़ाने के लिए भी उपयोगी है

मतली या उल्टी होने पर इसका उपयोग किया जाता है

शर्दियो के लिए रामबाण औषधि है 

⚠️ सावधानियाँ

अधिक मात्रा  में सेवन करने से जलन, एसिडिटी हो सकती है

 अल्सर और बवासीर कि जिनको समस्या है सेवन करने से पहले डॉक्टर कि सलाह जरुरी ले

गर्भावस्था में  भी डॉक्टर की सलाह जरुरी है

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